मुझको बना के रख लो टाइम पास का बहाना ................................................................
खुद भी देखो यारों देखेगा अब जमाना , मुझको बना के रख लो टाइम पास का बहाना
मुफलिसी है मेरे पास गुजरे ज़माने की , नही पड़ेगी जरूरत और कोई हंसाने की
कंकर उठा के साधो बन जाऊंगा निशाना , मुझको बना के रख लो ...............
नादाँ हूँ मै भोला हूँ हंसते हुए रोता हूँ
खाता हूँ गम के रोटी , जागते हुए सोता हूँ
बन जाऊंगा हकीकत जो था कभी फ़साना
मुझको बना के रख .......................................................................................
दुनिया की चकाचौंध में मै खो नही सकता
कर लो भी सितम जितने मै रो नही सकता
महफ़िल में हो नुमाइश
अजी तब हमें नचाना
मुझको बना के रख लो ...............................................................................
जितनी भी दोगे चोटें आहें नही भरूँगा
मर मर के जी रहा हूँ जी जी के क्या मरुंगा
जख्मे जिगर को अर्जुन अब तुमसे क्या दिखाना
मुझको .........................................................
हमने तो गँवा डाली इशारे में जिन्दगी
कोई कहे पूजा कोई कहे वन्दगी
दुनिया कहे पागल तुम कह लो दीवाना
मुझको बना के रख लो .................................
मेरे मित्र डॉक्टर मुकेश कुमार सिंह ( अर्जुन ) की एक रचना
खुद भी देखो यारों देखेगा अब जमाना , मुझको बना के रख लो टाइम पास का बहाना
मुफलिसी है मेरे पास गुजरे ज़माने की , नही पड़ेगी जरूरत और कोई हंसाने की
कंकर उठा के साधो बन जाऊंगा निशाना , मुझको बना के रख लो ...............
नादाँ हूँ मै भोला हूँ हंसते हुए रोता हूँ
खाता हूँ गम के रोटी , जागते हुए सोता हूँ
बन जाऊंगा हकीकत जो था कभी फ़साना
मुझको बना के रख .......................................................................................
दुनिया की चकाचौंध में मै खो नही सकता
कर लो भी सितम जितने मै रो नही सकता
महफ़िल में हो नुमाइश
अजी तब हमें नचाना
मुझको बना के रख लो ...............................................................................
जितनी भी दोगे चोटें आहें नही भरूँगा
मर मर के जी रहा हूँ जी जी के क्या मरुंगा
जख्मे जिगर को अर्जुन अब तुमसे क्या दिखाना
मुझको .........................................................
हमने तो गँवा डाली इशारे में जिन्दगी
कोई कहे पूजा कोई कहे वन्दगी
दुनिया कहे पागल तुम कह लो दीवाना
मुझको बना के रख लो .................................
मेरे मित्र डॉक्टर मुकेश कुमार सिंह ( अर्जुन ) की एक रचना